• कहीं पे धूप की चादर बिछा के बैठ गए - साये में धूप

  • कहीं पे धूप की चादर बिछा के बैठ गए
    कहीं पे शाम सिरहाने लगा के बैठ गए ।

    जले जो रेत में तलवे तो हमने ये देखा
    बहुत से लोग वहीं छटपटा के बैठ गए ।

    खड़े हुए थे अलावों की आंच लेने को
    सब अपनी अपनी हथेली जला के बैठ गए ।

    दुकानदार तो मेले में लुट गए यारों
    तमाशबीन दुकानें लगा के बैठ गए ।

    लहू लुहान नज़ारों का ज़िक्र आया तो
    शरीफ लोग उठे दूर जा के बैठ गए ।

    ये सोच कर कि दरख्तों में छांव होती है
    यहाँ बबूल के साए में आके बैठ गए ।

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